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उत्तरायणी पर आज रानीबाग गूंजेगा जियारानी की वीरगाथा से, तैयारियां हुई पूरी।
कत्यूरी वंशज जुटेंगे कुमाऊं के हरिद्वार में, लगेगा भव्य मेला—रातभर होगा जागर, श्रद्धालुओं के लिए भोजन-आवास की व्यवस्था।
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो प्रमोद बमेटा की रिपोर्ट ।

हल्द्वानी ।

उत्तरायणी पर्व पर कुमाऊं के हरिद्वार कहे जाने वाले रानीबाग में लगने वाले मेले की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस दौरान दूर-दूर से आने वाले कत्यूरी वंशज अपनी राजमाता जियारानी की वीरता और संघर्ष की गाथाओं को याद करते हुए रातभर जागर करेंगे। अगले दिन श्रद्धालु गार्गी (गौला) नदी में पुण्य स्नान कर धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होंगे।
जियारानी, जिन्हें मौला देवी के नाम से भी जाना जाता है, की लोकगाथाएं आज भी उत्तराखंड के जनजीवन का हिस्सा हैं। माना जाता है कि 14वीं शताब्दी में उन्होंने तैमूर लंग की सेना के आक्रमण का बहादुरी से सामना किया था। रानीबाग स्थित जियारानी मंदिर और गुफा आज भी उनकी स्मृति के प्रमुख आस्था केंद्र हैं।
भोजन व आवास की नि:शुल्क व्यवस्था
रानीबाग चित्रशिला क्षेत्र में मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्थानीय लोग व्यवस्था में जुट गए हैं। महिला मंगल दल की पूर्व अध्यक्ष रमा पांडे ने बताया कि आने वाले कत्युरी वंशजों के लिए निःशुल्क भोजन व रहने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जनमिलन केंद्र और हाईस्कूल में ठहरने की व्यवस्था रहेगी, वहीं फर्स्ट एड सुविधा भी मुहैय्या कराई जाएगी। 14 जनवरी को खिचड़ी का प्रसाद वितरण किया जाएगा।
उत्तरायणी के अवसर पर लगने वाला यह मेला आस्था, परंपरा और लोकसंस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा।

उत्तराखंड