कोसी नदी में भारी मशीनों से खनन! हजारों मजदूर हुए बेरोजगार, भूखमरी की कगार पर—प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, विपक्ष ने बोला हमला
दर्पण न्यूज 24/7
संवाददाता: करन तिवारी, रामनगर
रामनगर। कोसी नदी में उपखनिज भरान कार्य को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नदी में अवैध तौर पर बैंककैरा और अन्य भारी मशीनें चलाए जाने के विरोध में सैकड़ों मजदूर सड़क पर उतर आए। उन्होंने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि मशीनों के जरिए खनन होने से उनका पारंपरिक रोजगार पूरी तरह छिन गया है और अब उनके सामने भूखमरी की नौबत आ गई है।
मजदूरों ने बताया कि हर वर्ष वे बड़ी संख्या में कोसी नदी में उपखनिज निकालकर वाहनों में भरने का कार्य करते हैं, जिससे उनके परिवारों का जीवनयापन चलता है। लेकिन इस बार प्रशासन की शह पर मशीनों से खनन कराया जा रहा है, जिसके चलते मजदूरों को काम नहीं मिल पाया। मजदूरों ने दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने काम की उम्मीद में हजारों रुपये खर्च कर परात, बेलचे और अन्य औजार खरीदे, लेकिन मशीनों के कारण उन्हें खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आरटीआई कार्यकर्ता देव बिष्ट ने कहा कि हर साल करीब 50 हजार से एक लाख मजदूर कोसी नदी में काम करते हैं, लेकिन इस बार मशीनों के इस्तेमाल से सभी मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मशीनों से खनन बंद नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इसके बाद मजदूरों ने उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर उपजिलाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा।
वहीं, कांग्रेस के पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब से राज्य की नदियों का खनन एक हैदराबाद की कंपनी को दिया गया है, तब से नदियों में लगातार बैंककैरा व भारी मशीनें चलाई जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि नदी में 90-90 मीटर तक गहरे गड्ढे खोदे जा रहे हैं, जो भविष्य में बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्थानीय लोगों को रोजगार देने के वादे किए थे, लेकिन हकीकत यह है कि मजदूरों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है।
इस मामले पर उपजिलाधिकारी प्रमोद कुमार ने कहा कि नदी में मशीनें चलने से जुड़े वीडियो उनके संज्ञान में आए हैं। इस संबंध में वन विकास निगम के अधिकारियों को अवगत कराते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अवैध खनन पर औचक छापेमारी की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
कोसी नदी का मुद्दा अब सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि नियमों और पर्यावरण सुरक्षा से भी जुड़ गया है… देखते हैं प्रशासनिक कार्रवाई से मजदूरों की उम्मीदें कब तक पूरी होती हैं।
