“बिना विचारे जो करे, सो पाछे पछताए…”
विकासखंड हल्द्वानी की लाखों की सुरक्षा योजना पर चरितार्थ होती कहावत, रिचार्ज के अभाव में बंद पड़े सीसीटीवी कैमरे!
दर्पण न्यूज 24/7 हल्द्वानी।
“बिना विचारे जो करे, सो पाछे पछताए” वाली पुरानी कहावत इन दिनों विकासखंड हल्द्वानी की कार्यशैली पर पूरी तरह सटीक बैठती नजर आ रही है। गांवों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए सोलर लाइट युक्त कम्बाइंड सीसीटीवी कैमरे आज रिचार्ज के अभाव में बंद पड़े हैं और पूरी योजना महज शोपीस बनकर रह गई है।
विकासखंड द्वारा विभिन्न ग्राम पंचायतों में आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर इन कैमरों को स्थापित किया गया था। कैमरों को मोबाइल सिम से जोड़ा गया था और इनके संचालन के लिए प्रत्येक माह रिचार्ज कराया जाना जरूरी था। लेकिन योजना बनाते समय शायद इस स्थायी खर्च और रखरखाव की गंभीरता पर ध्यान ही नहीं दिया गया। परिणाम यह हुआ कि शुरुआती प्रचार और वाहवाही के बाद कैमरे धीरे-धीरे बंद होते चले गए।
जब यह योजना शुरू हुई थी तब तमाम जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदारों ने इसे ग्रामीण सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए खूब श्रेय लिया था। उद्घाटन हुए, फोटो खिंचे और विकास के बड़े-बड़े दावे किए गए। लेकिन अब जब कैमरों को दोबारा चालू कराने और नियमित रिचार्ज की आवश्यकता सामने आई है तो वही जिम्मेदार पूरी तरह मूकदर्शक बने हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कैमरों के संचालन और रखरखाव की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित नहीं थी तो आखिर लाखों रुपये खर्च कर यह योजना धरातल पर क्यों उतारी गई। अब यह पूरा मामला सरकारी धन के उपयोग और योजनाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
इस संबंध में खंड विकास अधिकारी तनवीर असगर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें फिलहाल मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सोमवार को पूरे प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि कैमरे वास्तव में रिचार्ज के अभाव में बंद पड़े हैं तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला माना जाएगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि विकासखंड इस बंद पड़ी योजना को दोबारा जीवित कर पाता है या फिर लाखों रुपये की यह महत्वाकांक्षी योजना सरकारी फाइलों और खंभों पर टंगे बंद कैमरों तक ही सिमट कर रह जाएगी।
