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जल संकट के दौर में धान की डीएसआर तकनीक बनी किसानों की नई उम्मीद!
कम लागत, कम पानी और बेहतर उत्पादन का प्रभावी विकल्प : राणा गुरजीत सिंह!
दर्पण न्यूज 24/7 बाजपुर!
देश में तेजी से गिरते भूजल स्तर और बढ़ते जल संकट के बीच धान उत्पादन की डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। यह तकनीक न केवल सिंचाई के लिए पानी की खपत कम करती है, बल्कि खेती की लागत घटाकर किसानों की आय बढ़ाने में भी मददगार साबित हो रही है।
पंजाब के कपूरथला से कांग्रेस विधायक एवं पूर्व मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने बाजपुर क्षेत्र के प्रगतिशील किसान सतवंत सिंह पड्डा के खेत का दौरा कर डीएसआर विधि से बोई गई सवाना-134 धान की फसल का निरीक्षण किया। उन्होंने खेत में पहुंचकर फसल की वृद्धि, पौधों की स्थिति और अपनाई गई तकनीक का बारीकी से अवलोकन किया तथा किसानों से उनके अनुभव भी साझा किए।
इस दौरान राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि पारंपरिक धान रोपाई पद्धति की तुलना में डीएसआर तकनीक कहीं अधिक लाभकारी है। इसमें नर्सरी तैयार करने, रोपाई कराने और खेत में लगातार पानी भरकर रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे पानी और श्रम दोनों की बचत होती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और सिंचाई संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है, तब डीएसआर जैसी तकनीकें कृषि के भविष्य को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
उन्होंने बताया कि डीएसआर अपनाने वाले किसानों को मजदूरों पर कम निर्भर रहना पड़ता है, खेत की तैयारी और बुवाई में समय की बचत होती है तथा फसल समय से तैयार हो जाती है। इससे अगली फसल की बुवाई के लिए अतिरिक्त समय मिल जाता है और पूरे फसल चक्र का बेहतर प्रबंधन संभव हो पाता है।
प्रगतिशील किसान सतवंत सिंह पड्डा ने बताया कि इस वर्ष उन्होंने अपने खेत में सवाना-134 धान की बुवाई डीएसआर पद्धति से की है। शुरुआती परिणाम उत्साहजनक हैं और फसल की बढ़वार संतोषजनक दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि बदलते कृषि परिदृश्य में किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर मुनीष राणा, दर्शन गोयल, कुलबीर चौधरी, राणा प्रभशरण सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों ने डीएसआर तकनीक को जल संरक्षण और लागत नियंत्रण की दिशा में प्रभावी कदम बताते हुए कहा कि यदि उन्हें उचित तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग मिले तो क्षेत्र में अधिक से अधिक किसान इस आधुनिक पद्धति को अपनाकर बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

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