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बारिश बनी मुसीबत, मलबे में दबी सड़कें, टूटी पेयजल लाइनें और उफनते नालों के बीच जूझता जनजीवन!
दर्पण न्यूज 24/7 | बागेश्वर-अल्मोड़ा
पहाड़ों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश एक बार फिर लोगों की मुश्किलों का सबब बन गई है। कहीं सड़कें मलबे और पत्थरों से पट गई हैं, कहीं पेयजल लाइनें टूटने से ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं, तो कहीं उफनते नाले लोगों की राह रोक रहे हैं। प्रकृति की इस मार के बीच पहाड़ का जीवन संघर्ष और धैर्य की नई कहानी लिख रहा है।
बागेश्वर जनपद में गुरुवार को हुई भीषण बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत निर्मित कमेडीदेवी-मलसूना-टकनार-भैसुड़ी मोटर मार्ग पर भारी मात्रा में मलबा और पत्थर आने से यातायात बाधित हो गया। सड़क के कई हिस्सों में मलबा जमा होने से ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल हो गया है। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और दैनिक जरूरतों के लिए निकलने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश का कहर सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहा। टकनार गांव की पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से गांव में पेयजल संकट गहरा गया है। ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना चुनौती बन गया है। ग्राम प्रधान गणेश राठौर ने विभागीय अधिकारियों से तत्काल निरीक्षण कर सड़क से मलबा हटाने और पेयजल लाइन की मरम्मत कराने की मांग की है।
इधर, पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता उमेश कुमार ने बताया कि सड़क खोलने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। मलबा हटाने के लिए मशीनें मौके पर तैनात कर दी गई हैं और मार्ग को जल्द से जल्द सुचारू करने का प्रयास किया जा रहा है।
उफनती नदियां और नाले बढ़ा रहे खतरा
लगातार हो रही बारिश के कारण सरयू और गोमती नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, जबकि छोटे-बड़े नाले भी उफान पर हैं। गौराड़-बिलखेत क्षेत्र में एक नाले का जलस्तर अचानक बढ़ जाने से लोगों को सड़क के दूसरे छोर पर करीब एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा। पानी का बहाव कम होने के बाद ही लोग सुरक्षित निकल सके। स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में स्थायी समाधान के लिए पुलिया निर्माण की मांग उठाई है।
अल्मोड़ा में दिन में छाया रात जैसा अंधेरा
अल्मोड़ा नगर में भी बारिश का असर साफ दिखाई दिया। बुधवार शाम से शुरू हुआ बारिश का दौर गुरुवार सुबह और तेज हो गया। सुबह के समय घने बादलों और मूसलाधार बारिश के कारण ऐसा प्रतीत हुआ मानो दिन में ही रात उतर आई हो। नालियों का पानी सड़कों पर बहने लगा और माल रोड समेत कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन गई। लोगों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दोपहर बाद बारिश थमने और हल्की धूप निकलने पर लोगों ने कुछ राहत महसूस की।
पहाड़ की पीड़ा फिर आई सामने
पहाड़ों में हर बारिश के साथ सामने आने वाली समस्याएं एक बार फिर उजागर हो गई हैं। कमजोर होती सड़कें, क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाएं और उफनते नालों के बीच ग्रामीण जीवन लगातार संघर्ष कर रहा है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचने और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
बारिश भले ही खेतों के लिए वरदान हो, लेकिन पहाड़ के गांवों के लिए यह अक्सर चिंता, खतरे और संघर्ष का दूसरा नाम बन जाती है। इस बार भी पहाड़ के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि मौसम जल्द मेहरबान होगा और उनकी मुश्किलें कम होंगी।

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