खबरें शेयर करें -

ऊर्जा संरक्षण के दावों के बीच हॉस्टल निर्माण में बिजली उपयोग पर संशय, जनता मांग रही निष्पक्ष जांच।

अब आरटीआई को माध्यम बनाकर साक्ष्यों को सामने लाएंगे आईटीआई एक्टिविस्ट।

हल्दूचौड़। पीएम श्री अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज हल्दूचौड़ परिसर में निर्माणाधीन आवासीय विद्यालय छात्रावास के निर्माण कार्य को लेकर उठे सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। करोड़ों रुपये की इस सरकारी परियोजना में निर्माण के दौरान विद्युत उपयोग को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर जारी है, लेकिन संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्था की ओर से अब तक कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब सामने नहीं आया है।
मामले को लेकर लगातार विभागों का ध्यान आकर्षित किए जाने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की जांच या आधिकारिक स्पष्टीकरण की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल और गहराता जा रहा है कि आखिर निर्माण कार्य में उपयोग की गई ऊर्जा का वास्तविक स्रोत क्या था और क्या सभी प्रक्रियाओं का पालन नियमानुसार किया गया?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब केंद्र और राज्य सरकारें ऊर्जा संरक्षण को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चला रही हैं तथा जनप्रतिनिधि भी ईंधन और बिजली बचत का संदेश दे रहे हैं, तो फिर सरकारी परियोजनाओं में इन मानकों का पालन किस स्तर पर सुनिश्चित किया जा रहा है। जनता यह भी जानना चाहती है कि ऊर्जा संरक्षण के संदेश केवल आम नागरिकों के लिए हैं या सरकारी निर्माण कार्यों में भी उनकी समान रूप से समीक्षा होती है।
जनचर्चाओं के बीच अब आवश्यकता इस बात की महसूस की जा रही है कि संबंधित विभाग पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराए। यदि जांच में सब कुछ नियमानुसार पाया जाता है तो स्थिति स्पष्ट होने से अनावश्यक भ्रम समाप्त होगा। वहीं यदि किसी स्तर पर अनियमितता, लापरवाही अथवा गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
क्षेत्रवासियों का मानना है कि सरकारी धन से संचालित परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अब निगाहें प्रशासन, कार्यदायी संस्था और संबंधित विभागों पर टिकी हैं कि वे जनता के सवालों का जवाब कब देते हैं और मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
इस बीच अब स्थानीय आरटीआई कार्यकर्ताओं ने मामले का संज्ञान लिया है उनका कहना है कि मामले में पूछे गए सवालों के जवाब संबंधित विभाग से जल्द प्राप्त नहीं होता है तो प्राप्त नहीं होगा तो अब वह सूचना के अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से परियोजना में विद्युत उपयोग, अस्थायी कनेक्शन, भुगतान एवं अन्य तकनीकी पहलुओं से संबंधित जानकारी प्राप्त करेंगे , उनका कहना है कि यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है तो दस्तावेजों के माध्यम से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, अन्यथा तथ्य सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो सकेगी।
अब देखना यह होगा कि विभाग स्वयं स्थिति स्पष्ट करता है या फिर आरटीआई एक्टिविस्ट आरटीआई के जरिए  दस्तावेज सामने लाकर इस पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर उजागर करेंगे।

उत्तराखंड