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दावे बनाम हकीकत: “मेरे घर की सड़क सबसे आखिर में बनेगी”… विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट के बयान ने दिलाई विकास पुरुष एन.डी. तिवारी की याद!
सादगी और जनसेवा का दावा, लेकिन हल्दूचौड़ में डॉक्टरों की कमी, बदहाल सड़कें और रोजगार जैसे सवाल बरकरार, अब जनता पूछ रही—भाषण या धरातल?
हल्दूचौड़। लालकुआं विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट का हाल ही में सोशल मीडिया पर चल रहा बयान क्षेत्र की राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “मेरे घर की सड़क सबसे आखिर में बनेगी”, क्योंकि उनकी प्राथमिकता पूरे विधानसभा क्षेत्र का विकास है, न कि निजी हित। उन्होंने सड़क, पेयजल, रोजगार, गौसंरक्षण और जनसेवा को अपनी राजनीति की आधारशिला बताते हुए सरकार और अपने प्रयासों का उल्लेख किया।
विधायक का यह बयान सुनने में जितना प्रभावशाली लगा, उतना ही इसने लोगों को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं विकास पुरुष स्वर्गीय पंडित नारायण दत्त तिवारी की याद भी दिला दी। तिवारी ने भी अपने पैतृक गांव को सड़क से जोड़ने की मांग पर कहा था कि “पहले प्रदेश के सभी गांवों तक सड़क पहुंचे, उसके बाद मेरे गांव की बारी आए।” संयोग यह रहा कि प्रदेश में विकास के अनेक कीर्तिमान स्थापित करने वाले तिवारी का अपना गांव आज भी सड़क सुविधा का इंतजार कर रहा है


यही तुलना अब लालकुआं विधानसभा में चर्चा का विषय बन गई है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह केवल सादगी का संदेश है या फिर विकास की नई कार्यशैली का संकेत?
हालांकि, दूसरी ओर जमीनी हकीकत कई सवाल भी खड़े कर रही है। हल्दूचौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। कई ग्रामीण संपर्क मार्ग बदहाल स्थिति में हैं। अवैध शराब और उसकी कथित “होम डिलीवरी” को लेकर समय-समय पर शिकायतें उठती रही हैं। रोजगार की तलाश में युवाओं का पलायन भी आज तक पूरी तरह नहीं थम पाया है। ऐसे में विपक्ष ही नहीं, आम लोग भी यह जानना चाहते हैं कि विकास के दावे जमीन पर कितने दिखाई दे रहे हैं।
दिलचस्प यह भी है कि अपने भाषण में स्वयं विधायक ने स्वीकार किया कि “पहला चुनाव कई कारणों से जीता जा सकता है, लेकिन दूसरा चुनाव केवल विकास और जनता की सेवा के दम पर ही जीता जाता है।” यही वजह है कि अब जनता की नजर भाषणों से ज्यादा काम पर टिकी हुई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सादगी और जनसेवा का संदेश हमेशा सकारात्मक माना जाता है, लेकिन लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता अपने अनुभव के आधार पर करती है। यदि अस्पतालों में डॉक्टर उपलब्ध होंगे, सड़कें गड्ढामुक्त होंगी, युवाओं को रोजगार मिलेगा और मूलभूत सुविधाएं समय पर मिलेंगी, तभी विकास के दावों पर जनता की मुहर लगेगी।
फिलहाल लालकुआं विधानसभा में एक ही सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है—क्या “मेरे घर की सड़क सबसे आखिर में बनेगी” वाला संकल्प विकास की नई मिसाल बनेगा, या फिर यह बयान भी राजनीतिक भाषणों तक ही सीमित रह जाएगा? इसका जवाब आने वाले समय में जनता ही देगी।

साढ़े चार वर्ष से अधिक का कार्यकाल लगभग पूरा हो चुका है। अब चुनावी दस्तक से पहले विधायक के विकास कार्यों का असली मूल्यांकन जनता करेगी। भाषणों में किए गए दावे और धरातल पर दिखाई देने वाले काम—दोनों की तुलना होगी। सड़क, स्वास्थ्य, रोजगार, पेयजल और मूलभूत सुविधाओं को लेकर जनता के मन में जो सवाल हैं, उनका जवाब अब चुनावी जनादेश देगा। लोकतंत्र में अंततः सबसे बड़ा प्रमाणपत्र जनता का विश्वास और उसका वोट ही होता है।

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