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हल्द्वानी में डीएम की सख्ती: दो रजिस्ट्रार कानूनगो पदावनत, चंदन हॉस्पिटल की जांच को समिति गठित!
सरकारी कार्य निजी व्यक्तियों से कराने पर कार्रवाई, अस्पताल में अवैध वसूली व लापरवाही के आरोपों की होगी जांच!
दर्पण न्यूज 24/7 संवाददाता
हल्द्वानी। प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने दो अलग-अलग मामलों में सख्त कदम उठाए हैं। राजस्व अभिलेखीय कार्यों को निजी व्यक्तियों से कराए जाने के मामले में दो रजिस्ट्रार कानूनगो को पदावनत किया गया है, वहीं उपचार के नाम पर अवैध वसूली और लापरवाही के आरोपों को लेकर चंदन हॉस्पिटल की जांच के लिए समिति गठित की गई है।
प्रशासनिक अभिलेखों के अनुसार रजिस्ट्रार कानूनगो भूपेश चंद और अर्जुन सिंह बिष्ट पर अपने पद से जुड़े वैधानिक राजस्व कार्य निजी एवं अनधिकृत व्यक्तियों से कराने का आरोप था। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने प्रारंभिक जांच कराई, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
जांच अधिकारी ने दस्तावेजी साक्ष्यों, अभिलेखों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों के आधार पर आरोपों को सही पाया। जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट हुआ कि दोनों कार्मिकों ने राजस्व से जुड़े संवेदनशील कार्यों में निजी व्यक्तियों की सहायता ली।
कारण बताओ नोटिस के जवाब में दोनों कार्मिकों ने अधिक कार्यभार और लंबित मामलों के दबाव का हवाला देते हुए निजी व्यक्ति की मदद लेने की बात स्वीकार की। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में वैधानिक शक्तियों को निजी व्यक्ति को सौंपना नियमों के खिलाफ है और इससे राजकीय अभिलेखों की गोपनीयता व विश्वसनीयता पर गंभीर खतरा उत्पन्न होता है।
प्रशासन ने इसे गंभीर कदाचार और कर्तव्य में घोर लापरवाही मानते हुए दोनों कार्मिकों को उनके वर्तमान पद से पदावनत कर निम्न पद एवं वेतनमान पर आसीन करने का दंड दिया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और इसे उनकी सेवा पुस्तिका में भी दर्ज किया जाएगा।
इसी क्रम में जिलाधिकारी ने हल्द्वानी स्थित चंदन हॉस्पिटल में उपचार के नाम पर अवैध वसूली, चिकित्सा में लापरवाही, आर्थिक शोषण और कुप्रबंधन के आरोपों को भी गंभीरता से लिया है। मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है, जिसमें अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) को अध्यक्ष, जबकि नगर मजिस्ट्रेट हल्द्वानी और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी को सदस्य नामित किया गया है।
समिति को अस्पताल में ली जा रही फीस, उपचार व्यवस्था और निर्धारित स्वास्थ्य मानकों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस संबंध में अपर जिलाधिकारी प्रशासन विवेक राय ने जानकारी रखने वाले संबंधित या असंबंधित व्यक्तियों से अपील की है कि वे सात दिनों के भीतर अपना मौखिक अथवा लिखित बयान और मामले से जुड़े साक्ष्य समिति के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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