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दर्पण न्यूज 24/7 विशेष
एसिड अटैक से झुलसा चेहरा, मगर हौसलों की उड़ान आसमान तक!
200 से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहीं कविता बिष्ट!

रामनगर। “मेरे सपनों की उड़ान आसमान तक है, मुझे बनानी अपनी पहचान आसमान तक है।” ये पंक्तियां उत्तराखंड की साहसी महिला कविता बिष्ट के जीवन पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। साल 2008 में हुए एक दर्दनाक एसिड अटैक ने भले ही उनका चेहरा और आंखों की रोशनी छीन ली हो, लेकिन उनके हौसलों और जज्बे को कभी कमजोर नहीं कर पाया।
आज वही कविता बिष्ट न सिर्फ खुद मजबूती से जीवन जी रही हैं, बल्कि सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखा रही हैं। उनका जीवन संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की ऐसी मिसाल है, जो यह साबित करता है कि अगर इंसान के भीतर विश्वास और लगन हो तो कोई भी मुश्किल उसे आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती।
एसिड अटैक के बाद भी नहीं टूटा हौसला
साल 2008 में दिल्ली में काम करने के दौरान दो युवकों ने कविता बिष्ट पर एसिड अटैक कर दिया था। इस हमले में उनका पूरा चेहरा बुरी तरह झुलस गया और दोनों आंखों की रोशनी भी चली गई। यह घटना किसी भी व्यक्ति को जिंदगी से हार मानने पर मजबूर कर सकती थी, लेकिन कविता ने हार मानने के बजाय अपने जीवन को नई दिशा देने का फैसला किया।
दृष्टि खोने के बाद भी उन्होंने खुद को कमजोर नहीं होने दिया। उन्होंने कढ़ाई, बुनाई, डिजाइनिंग, मोमबत्ती बनाना और विभिन्न प्रकार की हस्तकलाओं का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने इन कौशलों में महारत हासिल कर ली और अपने हुनर को दूसरों के लिए भी अवसर में बदल दिया।
200 से अधिक महिलाओं को दिया रोजगार
आज रामनगर क्षेत्र के जस्सागाजा इलाके में कविता बिष्ट महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुकी हैं। अपने प्रयासों से उन्होंने 200 से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ दिया है।
उनकी कार्यशाला में महिलाएं कई तरह के उत्पाद बनाती हैं, जिनमें शामिल हैं—
गोबर से बने पर्यावरण अनुकूल दीये
पारंपरिक ऐपण से सजाए गए दीये
जूट के बैग
कढ़ाई और बुनाई के उत्पाद
मोमबत्तियां
स्कूल बैग
सजावटी सामान
इन उत्पादों को स्थानीय बाजारों और मेलों में बेचा जाता है, जहां लोगों को यह सामान काफी पसंद आता है।
कविता बताती हैं कि उनकी कोशिश रहती है कि महिलाएं घर और परिवार की जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत बनें। इसलिए उनकी कार्यशाला में महिलाएं अपनी सुविधा के अनुसार काम करती हैं—कोई घर से दीये बनाती है तो कोई सजावटी सामान डिजाइन करती है।
जरूरतमंद बच्चों के लिए भी धड़कता है दिल
कविता का दिल सिर्फ महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि जरूरतमंद बच्चों के लिए भी धड़कता है। करीब आठ महीने पहले उन्होंने एक दिव्यांग बच्ची को गोद लिया, जो पैरों से कमजोर थी।
कविता और उनके परिवार की देखभाल और प्यार की वजह से अब उस बच्ची की हालत पहले से काफी बेहतर हो गई है और वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो रही है। कविता कहती हैं कि यह बच्ची अब उनके जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है।
सरकार ने बनाया था ब्रांड एंबेसडर
कविता बिष्ट के साहस और समाज के लिए किए जा रहे कार्यों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने साल 2013 में उन्हें महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में ब्रांड एंबेसडर बनाया था। हालांकि यह जिम्मेदारी और सहायता केवल एक साल तक ही सीमित रही, लेकिन इसके बावजूद कविता ने अपने काम को कभी रुकने नहीं दिया।
कविता कहती हैं,
“मेरी आंखों से दुनिया दिखना बंद हो गई, लेकिन मैंने अपने सपनों को मरने नहीं दिया। अब मैं चाहती हूं कि जिन महिलाओं के पास अवसर नहीं हैं, उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का आत्मविश्वास मिले।”
हौसलों से तय होती है सपनों की उड़ान
आज कई महिलाएं, जो कभी घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, वे अपने हाथों के हुनर से कमाई कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं।
कविता बिष्ट की कहानी यह साबित करती है कि जिंदगी में कितनी भी बड़ी मुश्किल क्यों न आ जाए, अगर इंसान के भीतर हिम्मत और विश्वास हो तो वह हर चुनौती को पार कर सकता है।
भले ही उनकी आंखें इस दुनिया को नहीं देख पातीं, लेकिन उनके सपनों की रोशनी आज सैकड़ों महिलाओं की जिंदगी को उजाला दे रही है।
कविता बिष्ट सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि साहस, आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की एक जीवंत मिसाल हैं। उनकी यात्रा हमें यह सिखाती है कि सपनों की उड़ान आंखों से नहीं, बल्कि हौसलों से तय होती है।