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“सरकार कागजों और विज्ञापनों में चला रही विकास”, हेमवती नंदन दुर्गापाल का तीखा हमला!
आईएसबीटी से लेकर बस अड्डों तक अधूरी योजनाओं पर उठाए सवाल, कहा— बजट की कमी छिपाने को चल रही श्रेय लेने की राजनीति!
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं।

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं समाजसेवी हेमवती नंदन दुर्गापाल ने प्रदेश सरकार की विकास नीति और जनसुविधाओं को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में विकास केवल कागजों, विज्ञापनों और राजनीतिक प्रचार तक सीमित होकर रह गया है, जबकि धरातल पर बड़ी परियोजनाएं वर्षों बाद भी अधूरी पड़ी हैं।
दुर्गापाल ने आईएसबीटी परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस परियोजना का बाकायदा शिलान्यास किया गया, आखिर किन परिस्थितियों और किन कारणों से उसे पहली जगह से हटा दिया गया, इसका जवाब आज तक जनता को नहीं मिला। उन्होंने कहा कि बाद में दूसरी जगह परियोजना को स्वीकृति मिलने पर सरकार ने खूब प्रचार किया, मिठाइयां बांटी गईं और बड़ी उपलब्धि बताई गई, लेकिन वहां भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। अब हालत यह है कि आईएसबीटी केवल फाइलों और कागजों में ही “निर्माणाधीन” दिखाई दे रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट नहीं है और यही कारण है कि महत्वपूर्ण जनसुविधाएं लगातार अधर में लटकी हुई हैं। दुर्गापाल ने कहा कि यदि सरकार के पास आर्थिक संसाधन और इच्छाशक्ति होती तो आईएसबीटी जैसी बहुप्रतीक्षित परियोजना वर्षों पहले धरातल पर उतर चुकी होती। उन्होंने कहा कि जगह की कोई कमी नहीं थी, लेकिन योजनाओं को लेकर गंभीरता का अभाव साफ दिखाई देता है।
उन्होंने लालकुआं बस अड्डे सहित अन्य लंबित जनसुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को आम जनता की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं रह गया है। उनका कहना था कि वर्तमान शासन केवल घोषणाओं और प्रचार अभियानों के सहारे विकास का भ्रम पैदा करने में जुटा है।
हेमवती नंदन दुर्गापाल ने कहा कि जब सरकार के पास बड़े विकास कार्य नहीं होते और आर्थिक तंगी गहराने लगती है, तब छोटे-छोटे कार्यों पर श्रेय लेने की राजनीति शुरू हो जाती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज सड़क के गड्ढे भरने, सर्विस लेन बनाने और फुटओवर ब्रिज जैसी सामान्य परियोजनाओं पर भी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश में बड़े स्तर पर विकास कार्य हो रहे होते तो नेताओं को छोटी-छोटी चीजों पर श्रेय लेने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि मामूली कार्यों को भी ऐतिहासिक उपलब्धि बताकर प्रचारित किया जा रहा है, जबकि जनता अधूरी परियोजनाओं और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रही है।

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