








युवाओं को मुंगेरी लाल के हसीन सपने दिखा रही सरकार? रोजगार के संकट के बीच युवाओं से बड़े सपने देखने की अपील!
दर्पण न्यूज 24/7 देहरादून। उत्तराखंड में रोजगार और पलायन का सवाल लगातार युवाओं के सामने खड़ा है और ऐसे समय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का युवाओं से “बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने” का आह्वान सियासी बहस का विषय बन गया है। दून विश्वविद्यालय के दीक्षारम्भ सत्र में मुख्यमंत्री ने युवाओं को नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया, लेकिन विपक्षी नजरिए से देखें तो जमीन पर रोजगार के पर्याप्त अवसरों की कमी के बीच यह संदेश “मुंगेरी लाल के हसीन सपने” दिखाने जैसा नजर आता है।
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय में करीब 11.20 करोड़ रुपये की लागत से बने बॉयोलॉजिकल साइंस प्रयोगशाला भवन और 17.39 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित केंद्रीय पुस्तकालय भवन का लोकार्पण किया। साथ ही कम्युनिटी रेडियो स्टेशन 88.4 एफएम का शुभारंभ किया। उन्होंने घोषणा की कि केंद्रीय पुस्तकालय का नाम बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर रखा जाएगा, विद्यार्थियों के लिए दो इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराई जाएंगी और विदेशी भाषाओं के विभागों के लिए पद सृजित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में युवाओं को सपने देखने, लक्ष्य तय करने और कठिन परिश्रम के साथ उन्हें पूरा करने की नसीहत दी। उन्होंने मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसी योजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि आज का युवा नौकरी तलाशने के साथ-साथ रोजगार देने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
लेकिन बड़ा सवाल यही है कि उत्तराखंड का युवा आखिर रोजगार के लिए जाए तो जाए कहां?
राज्य में सरकारी नौकरियों की सीमित संख्या, प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठते सवाल, निजी क्षेत्र में सीमित अवसर और रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन की मजबूरी के बीच केवल सपने देखने की सलाह कितनी कारगर होगी, यह सवाल सरकार से पूछा जाना स्वाभाविक है।
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में युवाओं का पलायन लंबे समय से गंभीर चुनौती बना हुआ है। हजारों युवा बेहतर रोजगार और भविष्य की तलाश में देहरादून, दिल्ली, चंडीगढ़, नोएडा, गुरुग्राम और दूसरे महानगरों का रुख करते हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय के मंच से बड़े सपने दिखाने से पहले सरकार को यह बताना होगा कि उन सपनों को पूरा करने के लिए स्थायी रोजगार, उद्योग, निवेश और स्थानीय स्तर पर अवसरों का कितना मजबूत ढांचा तैयार हुआ है।
सरकार युवाओं को स्टार्टअप और उद्यमिता का रास्ता दिखा रही है, लेकिन हर युवा के पास कारोबार शुरू करने के लिए पूंजी, बाजार, मार्गदर्शन और जोखिम उठाने की क्षमता हो, यह जरूरी नहीं। बड़ी संख्या में युवा आज भी एक सुरक्षित नौकरी की तलाश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या सरकार की प्राथमिकता युवाओं को केवल सपने दिखाना है या उन सपनों को जमीन पर उतारने के लिए पर्याप्त रोजगार पैदा करना भी?
मुख्यमंत्री ने एआई, मशीन लर्निंग, बिग डेटा, साइंस सिटी और एस्ट्रो पार्क जैसी आधुनिक परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए उत्तराखंड को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की बात कही। निश्चित रूप से ये पहलें महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनका वास्तविक लाभ कितने युवाओं तक पहुंचेगा और कितने स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, इसका जवाब भी सरकार को देना होगा।
युवाओं को सपने देखने से कोई रोक नहीं सकता, लेकिन सपनों और हकीकत के बीच रोजगार की जमीन भी चाहिए।
अगर पढ़ा-लिखा युवा रोजगार के लिए राज्य से बाहर जाने को मजबूर हो, गांव खाली होते रहें और पहाड़ों में पलायन की समस्या बनी रहे, तो केवल मंच से बड़े सपने देखने का संदेश अधूरा ही माना जाएगा।
युवाओं को सपने जरूर दिखाइए, लेकिन उन सपनों को हकीकत में बदलने के लिए नौकरी, उद्योग और रोजगार का रास्ता भी बनाइए। वरना विपक्ष का यह तंज अपनी जगह मजबूत रहेगा कि रोजगार के संकट से जूझ रहे उत्तराखंड के युवाओं को सरकार “मुंगेरी लाल के हसीन सपने” दिखा रही है।
दून विश्वविद्यालय में दीक्षारंभ सत्र का शुभारंभ, युवाओं से बड़े सपने देखने का आह्वान।
देहरादून। दून विश्वविद्यालय में गुरुवार को दीक्षारंभ सत्र 2026-27 एवं युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने, अपनी क्षमताओं को पहचानने और कठिन परिश्रम के साथ उन्हें साकार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जीवन केवल कक्षाओं और परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व निर्माण, नई सोच विकसित करने और जीवन की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 11.20 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित बॉयोलॉजिकल साइंस प्रयोगशाला भवन और 17.39 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित केंद्रीय पुस्तकालय भवन का लोकार्पण किया। साथ ही दून यूनिवर्सिटी कम्युनिटी रेडियो स्टेशन 88.4 एफएम का भी शुभारंभ किया गया।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि दून विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय का नाम बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर रखा जाएगा। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए विश्वविद्यालय को दो इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराने तथा स्पेनिश, जर्मन, फ्रेंच, चीनी और जापानी भाषाओं के विभागों के लिए आवश्यक पद सृजित करने की भी घोषणा की गई। कम्युनिटी रेडियो के संचालन के लिए कार्यक्रम समन्वयक और तकनीकी सहायक के दो पद भी सृजित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति होती है। जिस देश के युवा सपने देखने का साहस, उन्हें पूरा करने का संकल्प और कठिन परिश्रम करने की क्षमता रखते हैं, उस देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं के लिए मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसी पहलें संचालित की जा रही हैं।
धामी ने कहा कि आज का दौर नवाचार और तकनीक का है। प्रदेश में शिक्षा को आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए एआई, मशीन लर्निंग और बिग डेटा जैसे विषयों को बढ़ावा दिया जा रहा है। वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए साइंस सिटी और एस्ट्रो पार्क जैसी परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय में उपलब्ध संसाधनों और अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने तथा नई सोच के साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के संदेश का उल्लेख करते हुए युवाओं को लक्ष्य प्राप्त होने तक निरंतर प्रयास करते रहने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में विधायक विनोद चमोली, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह, अपर सचिव मनमोहन मैनाली सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और विद्यार्थी मौजूद रहे।
