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ब्रांडेड शराब के नाम पर करोड़ों का हाईटेक फर्जीवाड़ा बेनकाब!

एसटीएफ की छापेमारी में नकली मैकडॉवेल नंबर-1 बनाने की फैक्ट्री का खुलासा, अत्याधुनिक मशीनें और हजारों बोतलें बरामद!

दर्पण न्यूज 24×7 | ब्यूरो : प्रमोद बमेटा

बाजपुर। ऊधमसिंह नगर के बाजपुर औद्योगिक क्षेत्र में एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई में ब्रांडेड शराब के नाम पर चल रहे करोड़ों रुपये के हाईटेक फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। जांच में खुलासा हुआ कि चंडीगढ़ में बिकने वाली शराब को बाजपुर लाकर उसे मैकडॉवेल नंबर-1 ब्रांड का रूप देकर उत्तराखंड में असली बताकर बेचा जा रहा था। इस पूरे खेल में अत्याधुनिक फिलिंग, सीलिंग और लेबलिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे नकली और असली शराब में अंतर कर पाना बेहद मुश्किल हो जाता था।

एसटीएफ की छापेमारी में 1,632 मैकडॉवेल नंबर-1 के क्वार्टर, 1,016 बोतल 111 आरसीई व्हिस्की (चंडीगढ़ मार्क), उत्तराखंड आबकारी विभाग के नकली होलोग्राम, बड़ी संख्या में खाली क्वार्टर, ढक्कन, रैपर तथा फिलिंग, सीलिंग और लेबलिंग मशीनें बरामद की गईं।

प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरोह चंडीगढ़ मार्क की 111 आरसीई व्हिस्की को कम कीमत पर खरीदकर बाजपुर लाता था। इसके बाद 750 मिलीलीटर की प्रत्येक बोतल से 180 मिलीलीटर के चार क्वार्टर तैयार किए जाते थे। इन पर मैकडॉवेल नंबर-1 के नकली रैपर, ढक्कन और उत्तराखंड आबकारी विभाग के फर्जी होलोग्राम लगाकर उन्हें असली ब्रांड के रूप में बाजार में उतारा जाता था।

आबकारी विभाग की प्रारंभिक जांच के अनुसार करीब 240 रुपये कीमत वाली एक बोतल से चार क्वार्टर तैयार कर प्रत्येक को लगभग 170 रुपये में बेचा जाता था। इस तरह एक बोतल से करीब 680 रुपये की बिक्री कर गिरोह कई गुना मुनाफा कमा रहा था, जबकि सरकार को भारी राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा रहा था।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल अवैध शराब का कारोबार नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व, उपभोक्ताओं के विश्वास और प्रतिष्ठित शराब कंपनियों के ब्रांड का दुरुपयोग करने वाला संगठित अपराध है। एसटीएफ और आबकारी विभाग अब इस नेटवर्क से जुड़े शराब आपूर्तिकर्ताओं, नकली पैकेजिंग तैयार करने वालों और वितरण तंत्र की कड़ियों को जोड़ने में जुटे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस हाईटेक फर्जीवाड़े से जुड़े कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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