खबरें शेयर करें -

तेज हुई कुमाऊँ की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत को अतिक्रमणमुक्त कराने की मांग!

23 जुलाई को जिलाधिकारी से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल, चित्रशिला घाट और जिया रानी परिसर से अतिक्रमण हटाने की उठी आवाज!

दर्पण न्यूज 24/7 हल्द्वानी। कुमाऊँ की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण को लेकर अब जनआवाज तेज होने लगी है। रानीबाग स्थित पौराणिक चित्रशिला घाट और माता जिया रानी परिसर को अतिक्रमणमुक्त कराने की मांग को लेकर पहाड़ी कत्यूरी समाज ने जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। समाज का कहना है कि यदि समय रहते ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को अतिक्रमण से मुक्त नहीं कराया गया तो आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को बचा पाना कठिन हो जाएगा। इसी क्रम में 23 जुलाई को बड़ी संख्या में समाज के लोग जिलाधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेंगे और शीघ्र कार्रवाई की मांग करेंगे।

समाज की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट और माता जिया रानी परिसर कुमाऊँ की आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक पहचान के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। सदियों से इन स्थलों का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रहा है, लेकिन लगातार बढ़ते अतिक्रमण के कारण इनकी गरिमा प्रभावित हो रही है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार और प्रशासन का दायित्व है कि ऐसी धरोहरों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए और किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे को तत्काल हटाया जाए।

बैठक में यह आरोप भी लगाया गया कि चित्रेश्वर मंदिर परिसर में कुछ बाहरी लोगों द्वारा कथित रूप से अवैध तरीके से शनि मंदिर का निर्माण किया गया है। समाज के पदाधिकारियों का कहना था कि संबंधित प्राधिकरण दो बार ध्वस्तीकरण के आदेश जारी कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक आदेशों का पालन नहीं कराया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कार्रवाई के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं तो उन्हें लागू करने में आखिर देरी क्यों हो रही है। समाज ने प्रशासन से बिना किसी दबाव के कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की।

बैठक में सर्वसम्मति से यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि चित्रशिला घाट और माता जिया रानी परिसर को मानसखंड मंदिर माला में शामिल कराने के लिए राज्य सरकार से मांग की जाएगी। वक्ताओं का कहना था कि इससे इस ऐतिहासिक और धार्मिक क्षेत्र का संरक्षण, सौंदर्यीकरण और पर्यटन के दृष्टिकोण से समुचित विकास संभव हो सकेगा। साथ ही क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

पहाड़ी आर्मी के अध्यक्ष हरीश रावत ने कहा कि अपनी संस्कृति, इतिहास, धार्मिक आस्था और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए पहाड़ के लोगों को संगठित होकर आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि यह केवल अतिक्रमण हटाने का मुद्दा नहीं, बल्कि कुमाऊँ की विरासत और पहचान को सुरक्षित रखने का अभियान है। समाज के सभी वर्गों को इसमें सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।

बैठक की अध्यक्षता रमेश मनराल और चंदन मनराल ने की। इस दौरान सुभाष कांडपाल, राजेंद्र सिंह मनराल, चित्रांगद रावत, सीता रावत, खीम सिंह मनराल, राजेंद्र मनराल, शेर सिंह माहोड़ी, श्याम सिंह बिष्ट, कविता जीना, प्रेमा मेर, लोकेश सनवाल, राजेंद्र कांडपाल, गोपाल सिंह रुपवाल, मनोहर सिंह रावत, यशोदा रुपवाल, मोहन सिंह बोरा, आन सिंह रावत, मलय तिलारा, पंकज खत्री, गोविंद बिष्ट, सुरेश चंद्र पाठक, गिरीश चंद्र लोहनी, गौरव चौहान, धन सिंह घुघत्याल सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।

 

उत्तराखंड