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हाईकोर्ट सख्त—छात्रा मौत, भर्ती, वेतन, खनन समेत कई मामलों में अहम फैसले।

नैनीताल | दर्पण न्यूज 24/7

नैनीताल हाईकोर्ट ने मंगलवार को विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस, आयोग और प्रशासन से जवाब-तलब किया है। छात्रा की संदिग्ध मौत से लेकर फॉरेस्ट गार्ड भर्ती, वेतन पुनर्निर्धारण, अवैध खनन और जनहित याचिकाओं पर कोर्ट ने कई अहम निर्देश जारी किए हैं।

ग्राफिक एरा में छात्रा की मौत पर हाईकोर्ट सख्त।

भीमताल स्थित ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में बीसीए द्वितीय वर्ष की छात्रा वैश्वी तोमर की संदिग्ध मौत के मामले में हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने पुलिस से पूछा है कि घटना की सूचना मजिस्ट्रेट को क्यों नहीं दी गई। कोर्ट ने 2 मई तक जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, पुलिस ने बिना मजिस्ट्रेट को सूचना दिए पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए शव भेज दिया, जो नियमों के विपरीत है।

फॉरेस्ट गार्ड भर्ती मामले में आयोग के सचिव तलब।

2018 की फॉरेस्ट गार्ड भर्ती में परीक्षाफल रोके जाने के मामले में हाईकोर्ट ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के सचिव को 6 मई को कोर्ट में तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने आयोग से अब तक साक्ष्य प्रस्तुत न करने पर नाराजगी जताई।

स्टाफ नर्स वेतन पुनर्निर्धारण शासनादेश निरस्त।

हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग की स्टाफ नर्सों के वेतन पुनर्निर्धारण और रिकवरी के शासनादेश को नियम विरुद्ध बताते हुए निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने सरकार को छह माह के भीतर वसूली गई राशि वापस करने और तीन माह में विवाद निस्तारित करने के निर्देश दिए हैं।

बाजपुर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स मामले की याचिका खारिज।

नगर पालिका बाजपुर के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में हाट बाजार और पार्किंग के बजाय दुकानें बनाने के मामले में दायर जनहित याचिका को कोर्ट ने निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि 2015 के फैसले को एक दशक बाद चुनौती देना उचित नहीं है।

शराब दुकानों के मामले में दो सप्ताह में शपथपत्र मांगा।

नैनीताल और भवाली में शराब की दुकानों के मानक उल्लंघन के आरोपों पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर अतिरिक्त शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

अवैध खनन पर सख्ती—पोकलैंड और जेसीबी प्रतिबंधित।

पिथौरागढ़ में अवैध खनन के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश देते हुए पोकलैंड और जेसीबी जैसी भारी मशीनों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। कोर्ट ने जिलाधिकारी को नियमित औचक निरीक्षण के आदेश दिए हैं और कहा है कि नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगा।

हाईकोर्ट के इन फैसलों से साफ है कि न्यायालय प्रशासनिक लापरवाही और नियमों के उल्लंघन पर सख्त नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में इन मामलों में और बड़े फैसले सामने आ सकते हैं।

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