“भौं-भौं की महफ़िल थी, लाठी-डंडों की ग़ज़ल बन गई… कुत्ते देखते रह गए, इंसान लड़ते रह गए!”
✍️ प्रमोद बमेटा | दर्पण न्यूज 24×7
देहरादून। कहते हैं कि कुत्ते वफादार होते हैं, लेकिन देहरादून की इस घटना ने यह भी बता दिया कि कभी-कभी उनके मालिक जरूरत से ज्यादा “वफादारी” दिखा देते हैं। नेहरू कॉलोनी में दो पालतू कुत्तों के बीच शुरू हुई नोकझोंक कुछ ही मिनटों में इंसानों की ऐसी जंग में बदल गई कि लाठी-डंडे, धारदार हथियार और अस्पताल तक की नौबत आ गई।
जानकारी के मुताबिक शहर कोतवाली में तैनात दरोगा नवीन भारद्वाज अपने परिवार के साथ एक मुंडन समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम के बाद वह अपने पालतू कुत्ते को चेन से बांधकर गाड़ी की ओर जा रहे थे। तभी पड़ोसी का पिटबुल गेट से बाहर निकल आया और उनके कुत्ते पर झपट पड़ा। दोनों कुत्तों को बड़ी मुश्किल से अलग कराया गया।
यहीं तक मामला रहता तो शायद शाम तक दोनों कुत्ते भी एक-दूसरे को भूल चुके होते, लेकिन उनके मालिकों ने बात को ऐसा तूल दिया कि कहासुनी देखते-देखते हाथापाई में बदल गई। आरोप है कि दूसरे पक्ष के लोग लाठी-डंडे और धारदार हथियार लेकर बाहर आ गए और सड़क पर ही हमला कर दिया।
इस हमले में दरोगा नवीन भारद्वाज के सिर पर गंभीर चोट आई और उन्हें छह टांके लगाने पड़े। उन्हें बचाने पहुंचे उनके बेटे के सिर पर भी चोट लगी, जिसके चलते चार टांके लगाए गए। दोनों का उपचार अस्पताल में कराया गया।
पीड़ित पक्ष का यह भी आरोप है कि मारपीट के दौरान उनके गले से सोने की चेन भी गायब हो गई। मामले में कई नामजद लोगों और कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मारपीट, धमकी और अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया गया है। दूसरी ओर, दूसरे पक्ष ने भी अपनी शिकायत पुलिस को दी है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों की शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है।
व्यंग्य की बात यह है कि जिन दो कुत्तों की वजह से यह पूरा बवाल शुरू हुआ, वे तो कुछ देर बाद शायद अपनी-अपनी दुनिया में लौट गए होंगे। लेकिन इंसानों ने ऐसा मोर्चा संभाला कि मामला सीधे थाने, अस्पताल और अब पुलिस की जांच तक पहुंच गया।
