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बाजपुर के बाद दिनेशपुर में भी नकली दवा सिंडिकेट का पर्दाफाश, आखिर अब तक किसकी सरपरस्ती में चलता रहा मौत का कारोबार?

आयुर्वेद के नाम पर अंग्रेजी दवाओं की मिलावट, मशीनें, अवैध हथियार और हिरण के सींग बरामद, लगातार दूसरे बड़े खुलासे ने सरकारी निगरानी पर खड़े किए गंभीर सवाल!

दर्पण न्यूज 24×7 ब्यूरो | प्रमोद बमेटा

दिनेशपुर/ऊधमसिंह नगर। ऊधमसिंह नगर जिले में नकली और मिलावटी दवाओं के कारोबार ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभी बाजपुर में एसटीएफ द्वारा नकली अंग्रेजी दवाओं की फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुए ज्यादा समय भी नहीं बीता था कि अब दिनेशपुर के गूलरभोज क्षेत्र में आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर कथित रूप से लंबे समय से चल रहे एक और बड़े गोरखधंधे का खुलासा हो गया। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जिले में स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाला यह नेटवर्क किसकी आंखों के सामने फलता-फूलता रहा?

आयुष विभाग के निर्देश पर जिला प्रशासन की अनुमति से गठित संयुक्त टीम ने दिनेशपुर के मोतीपुर वार्ड-दो में स्वरूप सिंह के परिसर पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में आयुर्वेदिक पाउडर, मधुमेह समेत विभिन्न रोगों में प्रयुक्त अंग्रेजी दवाइयां, दवाओं को पीसने और मिश्रण तैयार करने वाली बड़ी मशीनें, तैयार औषधियां, एक अवैध हथियार तथा हिरण के सींग बरामद किए गए। बरामदगी ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी।

अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई कि कथित रूप से आयुर्वेदिक दवाओं में अंग्रेजी दवाओं को पीसकर मिलाया जाता था और तैयार उत्पादों की देश-विदेश तक आपूर्ति की जाती थी। हालांकि इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इतने बड़े स्तर पर मशीनों के साथ दवा निर्माण और सप्लाई का काम चल रहा था, तो संबंधित विभागों को इसकी भनक आखिर इतने वर्षों तक क्यों नहीं लगी? क्या नियमित निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित रहे? क्या लाइसेंस, गुणवत्ता परीक्षण और बाजार निगरानी व्यवस्था पूरी तरह विफल रही? यह मामला केवल एक फैक्ट्री का नहीं, बल्कि पूरे निगरानी तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।

जिले में कुछ ही समय के भीतर बाजपुर में नकली अंग्रेजी दवा फैक्ट्री और अब दिनेशपुर में आयुर्वेदिक दवाओं में कथित मिलावट का खुलासा यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं मिलावटी दवाओं का संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो न जाने कितने लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ जारी रहता।

जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. आलोक कुमार शुक्ला ने स्पष्ट कहा कि आयुर्वेद जैसी विश्वसनीय चिकित्सा पद्धति के नाम पर धोखाधड़ी और मिलावट किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। मौके पर बरामद अंग्रेजी दवाओं को औषधि निरीक्षक ने कब्जे में लेकर अलग से जांच शुरू कर दी है, जबकि पुलिस अवैध हथियार और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है।

अब पूरे जिले की निगाहें इस जांच पर टिकी हैं। सबसे अहम प्रश्न यह है कि क्या जांच केवल फैक्ट्री संचालक तक सीमित रहेगी या फिर उन लोगों तक भी पहुंचेगी, जिनकी कथित लापरवाही या संरक्षण में इतना बड़ा अवैध कारोबार वर्षों तक चलता रहा? यदि इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष और गहन जांच होती है तो आने वाले दिनों में कई और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।

 

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