हल्द्वानी में भीषण अग्निकांड: अमेजन स्टोर में जिंदा जले दो कर्मचारी, लाखों का सामान राख!
दर्पण न्यूज 24/7 हल्द्वानी। रामपुर रोड स्थित जीतपुर नेगी क्षेत्र में शुक्रवार देर रात अमेजन के एक स्टोर में भीषण आग लगने से दो कर्मचारियों की दर्दनाक मौत हो गई। आग इतनी भयावह थी कि कुछ ही मिनटों में पूरे गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में लाखों रुपये मूल्य का सामान जलकर राख हो गया, जबकि एक स्कूटी और टेंपो भी पूरी तरह खाक हो गए।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार रात करीब 11:30 बजे अमेजन स्टोर से धुआं और आग की लपटें उठती देख पास स्थित ब्लिंकिट स्टोर के कर्मचारियों ने तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल विभाग और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। एसपी सिटी मनोज कत्याल ने स्वयं घटनास्थल पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी की।
दमकल कर्मियों ने शटर तोड़कर अंदर प्रवेश किया और आग बुझाने का अभियान शुरू किया, लेकिन तब तक आग पूरे स्टोर को अपनी चपेट में ले चुकी थी। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। तलाशी अभियान के दौरान अंदर सो रहे दो कर्मचारियों के शव बरामद किए गए।
मृतकों की पहचान गौलापार निवासी नरेंद्र (मूल निवासी सोमेश्वर, अल्मोड़ा) तथा पंचायतघर क्षेत्र निवासी अमित के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में दोनों की मौत आग की चपेट में आने और दम घुटने से होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने परिजनों की मौजूदगी में शवों की शिनाख्त कराकर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए सुशीला तिवारी अस्पताल भेज दिया।
अग्निकांड में स्टोर में रखा भारी मात्रा में सामान जलकर राख हो गया। इसके अलावा चार्जिंग पर लगी एक स्कूटी और परिसर में खड़ा एक टेंपो भी आग की चपेट में आकर पूरी तरह नष्ट हो गया। घटना के समय स्टोर बंद था और दोनों कर्मचारी अंदर मौजूद थे।
एसपी सिटी मनोज कत्याल ने बताया कि सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम को तत्काल मौके पर रवाना किया गया था। आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन दो कर्मचारियों की जान नहीं बचाई जा सकी। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट सहित विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
उक्त हादसे ने एक बार फिर गोदामों और ई-कॉमर्स स्टोरेज सेंटरों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है। यदि आग लगने के समय अंदर मौजूद कर्मचारियों को समय रहते बाहर निकलने का अवसर मिलता, तो शायद दो परिवारों के चिराग आज बुझने से बच सकते थे।
