खबरें शेयर करें -

संतुलित उर्वरक प्रयोग से बढ़ेगा उत्पादन, मिट्टी परीक्षण है खेती की सफलता की कुंजी: मुकेश तिवारी!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो
फूलपुर, प्रयागराज। कॉपरेटिव रूरल डेवलपमेंट ट्रस्ट (कोरडेट) द्वारा आयोजित चार दिवसीय अंतरराज्यीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र में किसानों को मृदा स्वास्थ्य, पोषक तत्व प्रबंधन एवं संतुलित उर्वरक उपयोग की महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। प्रशिक्षण प्रभारी मुकेश तिवारी ने कहा कि खेती में अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता के लिए मिट्टी की वास्तविक जरूरत को समझना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि प्रत्येक क्षेत्र की मिट्टी की प्रकृति और उसमें उपलब्ध पोषक तत्वों की मात्रा अलग-अलग होती है। इसलिए बिना मृदा परीक्षण के उर्वरकों का प्रयोग करना लाभ के बजाय नुकसानदायक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि मिट्टी परीक्षण के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि खेत में किस पोषक तत्व की कमी है और उसकी पूर्ति किस प्रकार की जानी चाहिए।
मुकेश तिवारी ने पौधों के लिए आवश्यक प्रमुख पोषक तत्वों की जानकारी देते हुए बताया कि नाइट्रोजन , फॉस्फोरस  और पोटाश  फसल वृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनकी कमी होने पर फसलों का विकास प्रभावित होता है और उत्पादन घट जाता है। उन्होंने किसानों को यूरिया, डीएपी और विभिन्न ग्रेड के एनपीके उर्वरकों की उपयोगिता समझाते हुए बताया कि उर्वरकों पर लिखे अंक जैसे 18:18:18, 19:19:19 अथवा 12:32:16 उनमें मौजूद पोषक तत्वों की प्रतिशत मात्रा को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि संतुलित उर्वरक प्रबंधन न केवल फसल उत्पादन बढ़ाता है बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी लंबे समय तक बनाए रखता है। किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने, नियमित मृदा परीक्षण कराने और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी गई।
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा उर्वरक उपयोग से संबंधित अपने प्रश्न भी रखे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से समाधान किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें वैज्ञानिक खेती के नए आयामों की जानकारी मिली है, जिसका लाभ वे स्वयं और आसपास के किसानों को देकर भविष्य में उन्नत खेती कर आधुनिक कृषि प्रणाली अपनाएंगे।