अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत, भारत की प्रतिक्रिया पर उठे सवाल!
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ अमेरिका द्वारा चलाए जा रहे नाकेबंदी अभियान के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत की प्रतिक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है। बीबीसी न्यूज हिंदी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह अमेरिकी अभियान का पहला ऐसा मामला माना जा रहा है, जिसमें किसी हमले में मौतों की पुष्टि हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना ने भारतीय चालक दल वाले तेल टैंकर एमटी सेटेबेलो को निशाना बनाया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) का कहना है कि जहाज ने बार-बार दी गई चेतावनियों और निर्देशों का पालन नहीं किया था। कार्रवाई के दौरान जहाज के इंजन कक्ष को निशाना बनाया गया, जिससे तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई।
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पुष्टि की है कि लापता तीनों भारतीय नाविकों के शव बरामद कर लिए गए हैं। जहाज पर सवार अन्य भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित बचा लिए गए।
बीबीसी न्यूज हिंदी के अनुसार, भारत ने इस मामले में अमेरिका के समक्ष कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया है, लेकिन कई पूर्व राजनयिकों, सामरिक विशेषज्ञों और विदेश नीति विश्लेषकों का मानना है कि भारत की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत नरम रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत समुद्री व्यापार की सुरक्षा को बेहद महत्वपूर्ण मानता है और ऐसे हमले बंद होने चाहिए।
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने सवाल उठाया कि भारतीय नाविकों की मौत के बावजूद अमेरिका की कार्रवाई को प्रतिबंधों और नियमों के संदर्भ में क्यों देखा जा रहा है। वहीं सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि यदि ऐसी घटना में अमेरिकी नागरिक मारे गए होते तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कहीं अधिक तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिलती।
रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार कलोल भट्टाचार्जी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ स्टैनली जॉनी के हवाले से भी भारत के आधिकारिक रुख पर सवाल उठाए गए हैं। उनका कहना है कि भारतीय नागरिकों की मौत के मामले में हमलावर देश का स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए था।
बीबीसी न्यूज हिंदी के अनुसार, अमेरिका ने 13 अप्रैल से ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी अभियान शुरू किया था। उसका दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात को रोककर उस पर आर्थिक दबाव बनाना है। अमेरिकी सेंटकॉम का कहना है कि अभियान शुरू होने के बाद कई जहाजों को रोका गया है और अनेक जहाजों का मार्ग बदला गया है।
घटना ऐसे समय हुई है जब भारत और अमेरिका क्वॉड समूह के महत्वपूर्ण साझेदार हैं। समुद्री सुरक्षा और मुक्त नौवहन की वकालत करने वाले इस समूह के संदर्भ में भारतीय नाविकों की मौत ने नई कूटनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। फिलहाल अमेरिका की ओर से मृत भारतीय नाविकों के संबंध में कोई सार्वजनिक माफी या औपचारिक संवेदना व्यक्त नहीं की गई है, जिसे लेकर आलोचना जारी है।
(स्रोत: बीबीसी न्यूज हिंदी)
