हनुमान बनने पर ही राम मिलते हैं: हनुमान कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस व्यास आचार्य सतीश लोहनी जी का गूढ़ संदेश!
दर्पण न्यूज 24/7 हल्दूचौड़ (नैनीताल)।
श्री हनुमान मंदिर एवं श्री श्री 1008 बाबा केशव दास आश्रम बाबाजी की कुटिया, ग्राम दुम्काबंगर (उमापति, हल्दूचौड़) में आयोजित श्री हनुमान कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास आचार्य सतीश लोहनी जी ने “महावीर हनुमान” की संकल्पना पर प्रकाश डालते हुए श्रोताओं को गहरे आध्यात्मिक भाव से जोड़ा।
आचार्य लोहनी जी ने कहा कि महावीर केवल हनुमान जी ही हैं। भगवान श्रीराम को रघुवीर कहा जाता है, क्योंकि उनका यश संसार में गाया जाता है; लेकिन जिसका यश स्वयं रघुवीर गाते हैं, वही महावीर हैं—हनुमान जी। महावीर वही हो सकता है जो मद, मदन और मत्सर को वश में रखे तथा जिसने संसार के स्वामी को भी अपने वश में कर लिया हो। हनुमान जी से यह प्रेरणा मिलती है कि जब तक मनुष्य हनुमान नहीं बनता, तब तक राम की प्राप्ति नहीं होती—राम मिलन हनुमान बनने पर ही संभव है।
“हनुमान बनने के उपाय” बताते हुए आचार्य जी ने नाम के अक्षरों के माध्यम से जीवन सूत्र दिए—
ह — हां कहना सीखें (सत्कर्मों के लिए)
नु — नुकसान पहुंचाने वाली बातों को ना कहना सीखें
मा — मान देना सीखें (दूसरों का सम्मान)
न — नम्रता से रहना सीखें
उन्होंने आह्वान किया कि इन गुणों को जीवन में उतारकर ही मनुष्य हनुमान बन सकता है, जिससे राम की कृपा प्राप्त होकर जीवन सफल होता है।
इस अवसर पर यजमान श्रीमती एवं श्री देवीदत्त बमेटा जी, श्रीमती एवं श्री दिनेश चंद्र मिश्रा जी, पुजारी प्रकाश चंद्र जोशी जी, पंडित गणेश जोशी, बाबा केशव दास जी के अनन्य भक्त हरिदत्त कांडपाल जी, पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल जी, पूर्व प्रमुख गोपाल सिंह नेगी जी सहित मंदिर समिति के संरक्षक उमेश चंद्र कबड़वाल, अध्यक्ष कैलाश चंद्र दुम्का, उपाध्यक्ष दयाकिशन दुम्का, सचिव बालाकृष्ण दुम्का, कोषाध्यक्ष खीमानंद तिवारी, लेखा निरीक्षक दयाकिशन बमेटा, उप सचिव भुवन कबड़वाल व कार्यकारिणी के अनेक सदस्य तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कथा के दौरान वातावरण भक्ति, वैराग्य और आत्मबोध से ओतप्रोत रहा, और श्रोताओं ने हनुमान बनने के संकल्प के साथ राम भक्ति की ओर कदम बढ़ाने का प्रण लिया।
