खबरें शेयर करें -

हाईकोर्ट की सख्ती: कागजों में दुरुस्त स्वास्थ्य व्यवस्था, जमीन पर बदहाल हकीकत!
स्वास्थ्य सचिव को दो सप्ताह में एक्शन प्लान देने के आदेश, नैनीताल जिला अस्पताल का खुद निरीक्षण करने की सलाह!
दर्पण न्यूज 24/7 नैनीताल। उत्तराखंड की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट ने एक बार फिर सरकार और स्वास्थ्य विभाग को आईना दिखाया है। सरकारी रिपोर्टों में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर भले ही बेहतर बताई जा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत को लेकर अदालत ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया और स्वास्थ्य सचिव को दो सप्ताह के भीतर ठोस एक्शन प्लान और शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने स्वास्थ्य विभाग के विनय शंकर पांडे की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट पर संतुष्टि जाहिर नहीं की। अदालत ने स्वास्थ्य सचिव को नैनीताल जिला अस्पताल का स्वयं निरीक्षण करने की सलाह देते हुए यह संकेत भी दिया कि सरकारी कागजों में किए जा रहे दावों और अस्पतालों में मरीजों को मिल रही वास्तविक सुविधाओं के बीच बड़ा अंतर है।
हाईकोर्ट ने नैनीताल के सेनेटोरियम अस्पताल को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में तब्दील करने के संबंध में भी अगली सुनवाई तक अप्रूवल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों के तबादले पर भी कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र ने अदालत को बताया कि राजकीय मेडिकल कॉलेज सुशीला तिवारी और बीडी पांडे जिला चिकित्सालय से कई वरिष्ठ एवं विशेषज्ञ डॉक्टरों का तबादला ऐसे स्थानों पर कर दिया गया है, जहां अस्पताल पूरी तरह संचालित भी नहीं हैं। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है।
दूर-दराज क्षेत्रों से इलाज की उम्मीद में आने वाले मरीजों को मामूली जांच और उपचार के लिए भी रेफर किए जाने की स्थिति सामने आ रही है। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग से सीधा सवाल किया कि जब विशेषज्ञ डॉक्टरों का तबादला कर दिया गया तो खाली हुए पदों पर नए विशेषज्ञों की नियुक्ति क्यों नहीं की गई?
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त करने और रिक्त पदों को जल्द भरने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
उत्तराखंड की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा दर्पण न्यूज 24/7 लगातार प्रमुखता से उठाता रहा है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पद, मरीजों को रेफर किए जाने, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली तथा संसाधनों की कमी को लेकर पूर्व में भी कई खबरें प्रकाशित की जा चुकी हैं।
अब हाईकोर्ट की सख्ती ने उन सवालों को और मजबूती दी है, जिन्हें दर्पण न्यूज 24/7 लंबे समय से जमीनी स्तर से उठाता रहा है। सवाल अब सिर्फ सरकारी रिपोर्टों का नहीं, बल्कि यह है कि अस्पताल की चौखट पर पहुंचने वाले मरीज को समय पर डॉक्टर, जांच और इलाज मिल भी रहा है या नहीं?
अदालत के निर्देशों के बाद स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती कागजी रिपोर्ट तैयार करना नहीं, बल्कि उन दावों को जमीन पर उतारना होगी। दो सप्ताह में पेश होने वाले एक्शन प्लान पर अब निगाहें टिकी हैं कि सरकार बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर वास्तव में क्या ठोस कदम उठाती है।