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आमलकी एकादशी आज, भगवान विष्णु व आंवले के वृक्ष की होगी विशेष पूजा!
सूर्य अर्घ्य और मां अन्नपूर्णा की आराधना से मिलता है सुख-समृद्धि का आशीर्वाद!

आध्यात्म डेस्क दर्पण न्यूज 27/7।
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पावन आमलकी एकादशी शुक्रवार को श्रद्धा एवं आस्था के साथ मनाई जा रही है। होली पर्व से पूर्व आने वाली इस एकादशी का सनातन परंपरा में विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले के वृक्ष तथा मां अन्नपूर्णा की पूजा करने की परंपरा है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु को प्राकृतिक रंग एवं गुलाल अर्पित कर पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस बार एकादशी शुक्रवार को पड़ने से मां लक्ष्मी की आराधना का भी विशेष महत्व बताया गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन आंवले के वृक्ष की विधिवत पूजा करने अथवा आंवले का पौधा लगाने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। कई स्थानों पर आंवले के रस से स्नान करने की भी परंपरा है। आयुर्वेद में आंवले को स्वास्थ्यवर्धक औषधि माना गया है, जिसका नियमित सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है।
आमलकी एकादशी पर मां अन्नपूर्णा की पूजा भी विशेष फलदायी मानी गई है। इस दिन अन्न का सम्मान करने तथा जरूरतमंदों को भोजन कराने का संकल्प लेने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे घर में अन्न एवं धन की कभी कमी नहीं होती।
श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल, कुमकुम एवं अक्षत डालकर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इसके पश्चात घर के मंदिर में भगवान गणेश, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा के दौरान तुलसी दल, पुष्प एवं मिठाई अर्पित कर आरती की जाती है।
एकादशी व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर उपवास रखते हैं तथा फलाहार ग्रहण करते हैं। द्वादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा के बाद दान-पुण्य एवं भोजन कराकर व्रत का पारण किया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आमलकी एकादशी भक्ति, स्वास्थ्य और प्रकृति संरक्षण का संदेश देने वाला पावन पर्व माना जाता है।