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हाथियों के आतंक से बेहाल ग्रामीणों की उम्मीद बने दुर्गापाल —पूर्व मंत्री और उनके पुत्र समाजसेवी हेमवती नंदन दुर्गापाल की सक्रियता से फिर जगी राहत की आस।

दर्पण न्यूज 24*7 के लिए प्रमोद बमेटा की रिपोर्ट

लालकुआं।
तराई केंद्रीय वन प्रभाग के हाथी प्रभावित इलाकों में हाथियों के आतंक की कहानी नई नहीं है, लेकिन जब समाधान की उम्मीदें टूटने लगती हैं, तब कोई पुरानी उम्मीद फिर से रोशनी बनकर सामने आती है। यही वजह है कि भानदेव, नवाड़, राधा बंगर, हरिपुर बच्ची, कृष्णा नवाड़, गंगापुर और कबड़वाल जैसे गांवों के लोग आज भी पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल को याद करते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, दुर्गापाल के कार्यकाल में हाथियों के आतंक को काबू करने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए गए थे, जिसकी बदौलत लंबे समय तक उन्हें राहत मिली। लेकिन बीते कुछ समय में यह समस्या फिर सिर उठाने लगी है, जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस ज्वलंत मुद्दे पर खास रुचि नहीं दिखाई।
जब किसी जिम्मेदार ने ग्रामीणों की इस समस्या पर रुचि नहीं दिखाई तो ग्रामीण फिर पहुँचे दुर्गापाल के पास हाथियों के लगातार बढ़ते हमलों, फसल नुकसान और रात्रि भय के बीच परेशान ग्रामीणों ने पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल से मदद की गुहार लगाई। ग्रामीणों का कहना है कि—
“दुर्गापाल जी ने जब भी इस क्षेत्र की समस्या सुनी, समाधान कर दिखाया। आज फिर वही उम्मीद है।”
ग्रामीणों के आग्रह पर उनके पुत्र एवं समाजसेवी हेमवती नंदन दुर्गापाल ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने फसलों के नुकसान, रात्रि सुरक्षा और हाथियों की आवाजाही को लेकर ग्रामीणों की समस्याओं को विस्तार से सुना।
इसके बाद उन्होंने तुरंत मामले को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाते हुए—
डीएफओ यूसी तिवारी,
जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल,
एवं मुख्यमंत्री के विशेष सचिव, वरिष्ठ IFS डॉ. पराग मधुकर धकाते
से दूरभाष पर वार्ता कर ग्रामीणों को हाथियों के आतंक से राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
ग्रामीणों का मानना है कि समाजसेवी हेमवती नंदन दुर्गापाल के हस्तक्षेप के बाद लंबे समय बाद जिम्मेदार अधिकारियों ने समस्या को गंभीरता से सुना है जिससे ग्रामीणों में उम्मीदें बढ़ी हैं। गाँव की कई उम्रदराज  महिलाओं ने बताया कि शाम ढलते ही बच्चों को लेकर भय बना रहता है। वहीं किसान लगातार फसल बर्बाद होने से आर्थिक संकट में हैं।
इधर इस संवेदनशील मामले में अब पुनः दुर्गापाल परिवार की सक्रियता से ग्रामीणों को भरोसा है कि जल्द ही हाथियों के आतंक से निपटने के लिए प्रभावी और स्थायी समाधान निकलेगा।
इस दौरान मुख्य रूप से समाजसेवी कैलाश बमेटा,केशव दत्त बमेटा,जगदीश बमेटा,चंद्र शेखर बमेटा,नवीन बमेटा,कार्तिक बमेटा, पूरन तिवारी,रघुवर दत्त तिवारी, पूरन बमेटा, गुड्डू बमेटा समेत तमाम स्थानीय काश्तकार मौजूद रहे।

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